
बार-बार गर्भपात होने पर कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
October 24, 2026
बार-बार गर्भपात होने के बाद मन में अक्सर एक ही सवाल रहता है: आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, और अब क्या करें? हर नई उम्मीद के बाद जब नतीजा वैसा नहीं होता, तो थकान और घबराहट होना बिल्कुल स्वाभाविक है। ऐसे समय में recurrent pregnancy loss के कारणों को समझना ज़रूरी हो जाता है, और बार-बार गर्भपात के टेस्ट इसी दिशा में मदद करते हैं।
कई जोड़े सोचते हैं कि बार बार गर्भपात होने पर कौन से टेस्ट करवाएं, और क्या सारी जांचें एक साथ करवानी पड़ती हैं। सच यह है कि हर जोड़े की स्थिति अलग होती है। इसलिए जांच भी उनके इतिहास को देखकर तय की जाती है।
इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि बार बार गर्भपात के लिए जांच में क्या-क्या शामिल हो सकता है, ये टेस्ट क्या बताते हैं और इन्हें कब करवाना ठीक रहता है।
बार-बार गर्भपात के टेस्ट: जांच की ज़रूरत कब पड़ती है?
आमतौर पर जब किसी महिला का दो या उससे ज़्यादा बार गर्भपात हो जाता है, तो उसे recurrent pregnancy loss कहा जाता है। ऐसे में डॉक्टर गर्भपात के कारण जानने के लिए टेस्ट सुझा सकते हैं। इन्हें recurrent miscarriage tests या recurrent pregnancy loss tests भी कहा जाता है।
ध्यान रखें कि जांच का मतलब यह नहीं है कि हर बार कोई कमी मिलेगी। कई मामलों में रिपोर्ट सामान्य आती है, और यह जानकारी भी आगे की योजना बनाने में काम आती है। कुछ मामलों में पति की जांच भी की जाती है।
बार बार गर्भपात की जांच: शुरुआत कहाँ से होती है?
बार बार गर्भपात की जांच आमतौर पर बातचीत से शुरू होती है, सीधे टेस्ट से नहीं।
डॉक्टर से विस्तार से बातचीत
पिछली प्रेगनेंसी कितने हफ़्ते की थी, गर्भपात कब हुआ, कोई दवा या बीमारी रही या नहीं, ये बातें बहुत मायने रखती हैं। इन्हीं से तय होता है कि आगे कौन-से टेस्ट ज़्यादा काम के होंगे।
गर्भाशय की जांच
सोनोग्राफी से गर्भाशय की बनावट देखी जाती है। ज़रूरत हो तो 3D अल्ट्रासाउंड, HSG या हिस्टेरोस्कोपी भी सुझाई जा सकती है। इससे पॉलिप, फाइब्रॉइड या गर्भाशय की बनावट की किसी समस्या का पता चल सकता है। ये सभी बार बार गर्भपात के कारणों की जांच का हिस्सा हैं।
गर्भपात में हार्मोन टेस्ट
गर्भपात में हार्मोन टेस्ट से यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर के हार्मोन गर्भ को संभालने के लिए ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। इनमें आमतौर पर ये शामिल हो सकते हैं:
- थायरॉइड (TSH)
- प्रोलैक्टिन
- ब्लड शुगर या HbA1c
- PCOS से जुड़े हार्मोन, जब डॉक्टर को ज़रूरी लगे
थायरॉइड या शुगर जैसी समस्याएँ कई बार बिना किसी साफ़ लक्षण के भी हो सकती हैं। इसीलिए इनकी जांच की जाती है।
Recurrent Miscarriage Blood Tests: खून की जांचें
Recurrent miscarriage blood tests में खून से जुड़ी कई जांचें आती हैं। Recurrent pregnancy loss blood tests के तहत आमतौर पर ये देखे जाते हैं:
- CBC, ब्लड ग्रुप और Rh फैक्टर
- एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी (APLA): ये ऐसे एंटीबॉडी हैं जो खून के जमने की प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं
- विटामिन D और B12 जैसी कमियाँ, ज़रूरत होने पर
खून के जमने से जुड़ी कुछ और जांचें हर किसी को नहीं करवानी पड़तीं। इन्हें डॉक्टर मरीज़ का इतिहास देखकर सुझाते हैं।
गर्भपात में जेनेटिक टेस्ट
गर्भपात में जेनेटिक टेस्ट दो तरह से हो सकता है।
पहला है पति-पत्नी का कैरियोटाइप टेस्ट। इसमें क्रोमोसोम (शरीर की जेनेटिक जानकारी रखने वाली संरचनाएँ) की बनावट देखी जाती है।
दूसरा है गर्भपात के बाद निकले ऊतक की जेनेटिक जांच। इससे पता चल सकता है कि भ्रूण में क्रोमोसोम से जुड़ी कोई गड़बड़ी थी या नहीं।
क्रोमोसोम की गड़बड़ी गर्भपात का एक आम कारण मानी जाती है। लेकिन यह किसी की गलती नहीं होती।
गर्भपात में इम्यूनोलॉजी टेस्ट
कुछ मामलों में शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system) भी गर्भ के टिकने में भूमिका निभा सकती है। गर्भपात में इम्यूनोलॉजी टेस्ट में कुछ खास एंटीबॉडी और इम्यून कोशिकाओं से जुड़ी जांचें शामिल हो सकती हैं।
ये टेस्ट हर मरीज़ के लिए ज़रूरी नहीं होते। इनकी रिपोर्ट को हमेशा मरीज़ की पूरी हिस्ट्री के साथ देखा जाना चाहिए।
डॉ. राऊत सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव इम्यूनोलॉजी (ICPRM) में रिप्रोडक्टिव इम्यूनोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहाँ चुनिंदा मरीज़ों का उनकी स्थिति के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है।
Recurrent Pregnancy Loss Diagnosis: रिपोर्ट आने के बाद क्या?
Recurrent miscarriage diagnosis का मतलब सिर्फ़ एक कारण ढूँढना नहीं है। कई बार एक से ज़्यादा बातें मिलकर असर डालती हैं, और कई बार कारण साफ़ नहीं मिलता।
Recurrent pregnancy loss diagnosis में सभी रिपोर्ट को एक साथ देखकर आगे की योजना बनाई जाती है। गर्भपात के बाद कौन से टेस्ट करवाने चाहिए, यह इस पर भी निर्भर करता है कि गर्भपात कब हुआ और कितनी बार हुआ।
इसलिए खुद टेस्ट चुनने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
बार-बार गर्भपात का अनुभव भावनात्मक रूप से मुश्किल हो सकता है, और सही जानकारी इस समय बड़ा सहारा बन सकती है। हार्मोन, ब्लड, जेनेटिक और इम्यूनोलॉजी जैसी जांचें अलग-अलग पहलुओं को समझने में मदद करती हैं।
हर जोड़े के लिए सभी टेस्ट ज़रूरी नहीं होते, और हर मामले में कारण मिल जाए, यह भी ज़रूरी नहीं। इसलिए रिपोर्ट को अकेले देखने के बजाय पूरी हिस्ट्री के साथ समझना चाहिए।
सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह और सही मूल्यांकन से जोड़े अपने अगले कदम ज़्यादा भरोसे के साथ तय कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मुझे बार-बार मिसकैरेज क्यों हो रहा है?
इसकी कोई एक वजह होना ज़रूरी नहीं है। बच्चे में क्रोमोसोम की गड़बड़ी, थायरॉइड जैसी हार्मोन की समस्या, गर्भाशय की बनावट, खून के जमने से जुड़ी बातें और कुछ महिलाओं में इम्यून से जुड़े कारण भूमिका निभा सकते हैं। कई मामलों में कारण पता भी नहीं चलता, इसलिए सही जांच करवाना मदद करता है।
2. कितने मिसकैरेज के बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
एक मिसकैरेज काफ़ी आम है और आमतौर पर इसमें विस्तृत जांच की ज़रूरत नहीं होती। दो या उससे ज़्यादा बार होने पर डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी जाती है। उम्र ज़्यादा हो, गर्भपात देर से हुआ हो या कोई और बीमारी हो, तो पहले भी दिखा सकती हैं।
3. दो बार गर्भपात के बाद कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
आमतौर पर गर्भाशय की सोनोग्राफी, खून की जांच, थायरॉइड और शुगर की जांच की जाती है। कुछ मामलों में जेनेटिक और इम्यूनोलॉजी टेस्ट भी जोड़े जाते हैं। कौन-से टेस्ट ज़रूरी हैं, यह आपकी हिस्ट्री देखकर डॉक्टर तय करते हैं।
4. क्या बार-बार मिसकैरेज होना मेरी गलती है?
नहीं। रोज़ के काम, ऑफिस जाना, सफ़र करना या हल्की-फुल्की चोट आमतौर पर मिसकैरेज की वजह नहीं होती। ज़्यादातर गर्भपात ऐसे कारणों से होते हैं जो हमारे हाथ में नहीं होते।
5. क्या टेंशन या स्ट्रेस से बार-बार मिसकैरेज हो सकता है?
रोज़मर्रा का सामान्य तनाव बार-बार गर्भपात का साबित कारण नहीं माना जाता। फिर भी गर्भपात के बाद का मानसिक दबाव असली होता है, और अपना ध्यान रखना ज़रूरी है। किसी भरोसेमंद व्यक्ति या काउंसलर से बात करना मदद कर सकता है।
6. क्या पति की सेहत की वजह से भी मिसकैरेज हो सकता है?
कुछ मामलों में हाँ। शुक्राणुओं की गुणवत्ता और जेनेटिक कारण भी असर डाल सकते हैं। इसीलिए डॉक्टर कई बार पति की जांच भी करवाते हैं, जैसे सीमेन रिपोर्ट या क्रोमोसोम टेस्ट।
7. क्या सारी रिपोर्ट नॉर्मल होने पर भी मिसकैरेज हो सकता है?
हाँ। कई जोड़ों में रिपोर्ट नॉर्मल आती हैं और फिर भी कारण साफ़ नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं कि कुछ किया नहीं जा सकता। डॉक्टर सभी रिपोर्ट एक साथ देखकर आगे की योजना बना सकते हैं।
8. मिसकैरेज के बाद दोबारा प्रेगनेंसी की कोशिश कब कर सकते हैं?
कई महिलाएँ शारीरिक रूप से ठीक होने और मानसिक रूप से तैयार महसूस करने पर कोशिश शुरू कर सकती हैं, लेकिन सही समय हर किसी के लिए अलग होता है। बार-बार गर्भपात हुआ हो, तो पहले जांच करवाकर फिर डॉक्टर की सलाह से योजना बनाना बेहतर रहता है।