
IVF बार-बार क्यों फेल होता है?
October 24, 2026
आईवीएफ का हर चक्र उम्मीद के साथ शुरू होता है। दवाइयाँ, इंजेक्शन, अस्पताल के चक्कर और फिर लंबा इंतज़ार। ऐसे में रिपोर्ट नकारात्मक आए, तो दिल टूट जाता है। जब यही एक नहीं, दो-तीन बार हो जाए, तो मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कमी कहाँ रह गई?
कई दंपति ऐसे समय में खुद को या एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं। सच यह है कि recurrent IVF failure किसी एक की गलती से नहीं होता। गर्भ ठहरने के लिए कई बातों का एक साथ सही बैठना ज़रूरी होता है।
इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि IVF बार-बार फेल होने के कारण क्या हो सकते हैं, कौन सी जाँचें मदद कर सकती हैं और आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
IVF बार बार क्यों फेल होता है?
आईवीएफ को बीज और ज़मीन की तरह समझिए। भ्रूण बीज है और गर्भाशय की भीतरी परत ज़मीन। बीज अच्छा हो, फिर भी ज़मीन तैयार न हो या मौसम (हार्मोन और समय) साथ न दे, तो पौधा नहीं जम पाता।
प्रयोगशाला में भ्रूण को जो श्रेणी दी जाती है, वह सिर्फ़ यह बताती है कि वह सूक्ष्मदर्शी में कैसा दिखता है। इससे पक्का नहीं होता कि उसके क्रोमोसोम सही हैं या वह ज़रूर गर्भाशय में चिपक जाएगा। इसीलिए अच्छी श्रेणी के भ्रूण के बाद भी गर्भ नहीं ठहर सकता।
जब कई बार अच्छे भ्रूण स्थानांतरित करने पर भी गर्भ नहीं ठहरता, तो डॉक्टर इसे recurrent implantation failure कहते हैं।
IVF बार-बार फेल होने के कारण
IVF failure के कारण हर दंपति में अलग हो सकते हैं, और कई बार एक से ज़्यादा कारण साथ में होते हैं।
भ्रूण से जुड़े कारण
भ्रूण के क्रोमोसोम की संख्या में गड़बड़ी गर्भ को टिकने से रोक सकती है। उम्र बढ़ने के साथ इसकी संभावना बढ़ सकती है। यह गड़बड़ी सिर्फ़ देखने से पकड़ में नहीं आती।
गर्भाशय की परत से जुड़े कारण
भ्रूण को चिपकने के लिए गर्भाशय की भीतरी परत का सही समय पर तैयार होना ज़रूरी है। परत ठीक से तैयार न हो, तो अच्छा भ्रूण भी नहीं टिक पाता।
गर्भाशय की बनावट से जुड़े कारण
पॉलिप, कुछ तरह के फाइब्रॉइड, भीतर चिपकाव, एडेनोमायोसिस या नली में पानी भरना जैसी समस्याएँ IVF implantation failure के कारण बन सकती हैं।
हार्मोन और समय का तालमेल
प्रोजेस्टेरोन हार्मोन गर्भाशय की परत को तैयार करता है। भ्रूण के विकास और परत की तैयारी का तालमेल बिगड़े, तो गर्भ का टिकना मुश्किल हो सकता है।
शुक्राणु से जुड़े कारण
भ्रूण में आधा अनुवांशिक पदार्थ पिता से आता है। सामान्य वीर्य रिपोर्ट हमेशा शुक्राणु की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती, इसलिए पुरुष की जाँच भी ज़रूरी हो सकती है।
याद रखिए, बार बार IVF असफल होने के कारण हर मामले में अलग होते हैं। एक कारण को सब पर लागू नहीं किया जा सकता।
IVF failure और इम्यून सिस्टम
गर्भ में पल रहे शिशु का आधा हिस्सा पिता से आता है। माँ के शरीर की रक्षा प्रणाली को उसे “बाहरी खतरा” नहीं, बल्कि एक सुरक्षित मेहमान की तरह पहचानना होता है। इसके लिए प्रतिरक्षा तंत्र में संतुलन चाहिए।
कुछ महिलाओं में यह संतुलन बिगड़ सकता है, जैसे शरीर में सूजन ज़्यादा होना या स्वप्रतिरक्षी स्थितियाँ। यहीं IVF failure और reproductive immunology का संबंध आता है। प्रजनन प्रतिरक्षा विज्ञान वह शाखा है जो समझती है कि प्रतिरक्षा तंत्र गर्भ के टिकने और आगे बढ़ने में क्या भूमिका निभाता है।
ध्यान रहे, हर आईवीएफ विफलता का कारण प्रतिरक्षा तंत्र नहीं होता। यह पहलू चुनिंदा मरीज़ों में देखा जाता है, खासकर जब repeated IVF failure या गर्भपात का इतिहास हो।
IVF failure के बाद कौन से टेस्ट करवाएं?
कौन सी जाँच ज़रूरी है, यह आपके पिछले चक्र देखकर डॉक्टर तय करते हैं। सभी जाँचें सबके लिए ज़रूरी नहीं होतीं। आमतौर पर इन पर विचार किया जाता है:
- भ्रूण: कुछ मामलों में भ्रूण की अनुवांशिक जाँच
- गर्भाशय: अल्ट्रासाउंड, हिस्टेरोस्कोपी जैसी जाँचें
- हार्मोन: थायरॉइड और अन्य हार्मोन का स्तर
- शुक्राणु: वीर्य रिपोर्ट के साथ ज़रूरत पड़ने पर शुक्राणु के डीएनए की जाँच
- प्रतिरक्षा: चुनिंदा मामलों में प्रतिरक्षा संबंधी मूल्यांकन
IVF failure के बाद कौन से टेस्ट करवाएं, यह सवाल अपने विशेषज्ञ से ज़रूर पूछिए, ताकि बेवजह की जाँचें न हों।
बार बार IVF फेल होने पर क्या करें?
IVF फेल होने के बाद क्या करें, यह सवाल हर दंपति के मन में आता है। ये कदम मदद कर सकते हैं:
- खुद को या साथी को दोष न दें। विफलता किसी की गलती नहीं है।
- सारी रिपोर्ट इकट्ठा करें। पिछले सभी चक्र, भ्रूण की जानकारी और दवाइयों का ब्यौरा किसी विशेषज्ञ को दिखाइए।
- कारण खोजिए। जाँचें सोच-समझकर करवाइए।
- इलाज के कारण के हिसाब से चुनिए।
Repeated IVF failure treatment कारण पर निर्भर करता है। गर्भाशय की समस्या हो तो उसे ठीक किया जा सकता है। हार्मोन का सहारा या भ्रूण स्थानांतरण का समय बदला जा सकता है। जब कोई प्रतिरक्षा संबंधी समस्या पहचानी जाए, तो चुनिंदा मरीज़ों में प्रतिरक्षा को संतुलित करने वाले इलाज पर विचार किया जा सकता है।
डॉ. राऊत सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव इम्यूनोलॉजी (ICPRM) में प्रजनन प्रतिरक्षा विज्ञान पर खास ध्यान दिया जाता है। यहाँ हर मरीज़ का इतिहास देखकर तय किया जाता है कि इम्यूलिट® जैसा इलाज उनके लिए उपयुक्त है या नहीं।
निष्कर्ष
आईवीएफ का बार-बार विफल होना बेहद थका देने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे रास्ता बंद है। भ्रूण, गर्भाशय की परत, गर्भाशय की बनावट, हार्मोन, शुक्राणु और प्रतिरक्षा तंत्र, ये सब मिलकर तय करते हैं कि गर्भ ठहरेगा या नहीं।
सही जाँच और पूरे इतिहास की समीक्षा से कारण समझने में मदद मिल सकती है। हर दंपति का सफ़र अलग होता है, इसलिए अपनी स्थिति के हिसाब से सही मार्गदर्शन लेना सबसे ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. IVF बार-बार फेल होने के कारण क्या हो सकते हैं?
भ्रूण के क्रोमोसोम में गड़बड़ी, गर्भाशय की परत का तैयार न होना, गर्भाशय की समस्याएँ, हार्मोन और समय की दिक्कतें, शुक्राणु से जुड़े कारण और चुनिंदा मामलों में प्रतिरक्षा संबंधी कारण।
2. क्या अच्छे भ्रूण के बाद भी आईवीएफ विफल हो सकता है?
हाँ। श्रेणी सिर्फ़ भ्रूण का दिखना बताती है। गर्भ का टिकना गर्भाशय की परत, हार्मोन और समय पर भी निर्भर करता है।
3. क्या एक बार आईवीएफ विफल होने का मतलब कोई बड़ी समस्या है?
ज़रूरी नहीं। एक असफल चक्र का मतलब हमेशा कोई गंभीर समस्या नहीं होता।
4. क्या आईवीएफ विफलता का कारण प्रतिरक्षा तंत्र भी हो सकता है?
कुछ चुनिंदा मरीज़ों में हो सकता है, खासकर बार-बार विफलता के मामलों में। लेकिन हर विफलता का कारण प्रतिरक्षा तंत्र नहीं होता।
5. कितने चक्रों के बाद जाँच करवानी चाहिए?
कोई तय संख्या नहीं है। अगर कई बार अच्छे भ्रूण के बाद भी गर्भ नहीं ठहरा है, तो विशेषज्ञ से पूरी समीक्षा करवाना बेहतर है।
6. क्या आईवीएफ विफल होने के बाद दोबारा सफलता मिल सकती है?
हाँ, संभव है। कारण समझकर इलाज में बदलाव करने से आगे के चक्रों में मदद मिल सकती है, हालाँकि नतीजे की गारंटी नहीं दी जा सकती।